मैं जब नए घर में आया तो पहले ही दिन शाम को एक औरत सामने वाले घर के दरवाजे पर खड़ी थी। स्नेहा। उसने हल्की गुलाबी साड़ी पहनी थी जो उसके गोरे बदन पर इतनी सुंदर लग रही थी। साड़ी का पल्लू इतना हल्का था कि उसके ब्लाउज का कट साफ दिख रहा था – गहरा गोल कट, जिसमें से उसके दोनों चूचों का ऊपरी हिस्सा सफेद और गोरा दिख रहा था। पड़ोसन माँ बेटी की चुदाई
“नमस्ते, आप नए आए हैं?” उसने पूछा, आवाज में एक अजीब सी मधुरता थी जो मेरे कानों में गूंज गई।
“हां, मैं अजय हूं,” मैंने कहा, लेकिन मेरी आंखें उसके बदन पर थीं। उसकी उम्र करीब 45 साल की लग रही थी, लेकिन फिगर ऐसा कि कोई 25 साल की लड़की शर्मा जाए। साड़ी में उसकी कमर इतनी पतली, और गांड इतनी भारी और उभरी हुई कि मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया।
“मैं स्नेहा, आपके सामने रहती हूं,” उसने मुस्कुराते हुए कहा, और जानबूझकर झुककर अपनी साड़ी ठीक की। उस वक्त उसका पल्लू सरक गया और मैंने उसके ब्लाउज के अंदर का नजारा देख लिया – गोरे, भारी चूचे, गहरे गुलाबी निप्पल जो ब्लाउज के कप में कसे हुए थे।
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अगले कुछ दिनों में हमारी मुलाकातें होने लगीं। हर बार वह कुछ न कुछ ऐसा करती जिससे मैं उसे देखूं। एक दिन वह सुबह-सुबह बाहर निकली – सिर्फ नाइटी में। नाइटी इतनी पतली और छोटी थी कि उसके नीचे से पैंटी का रंग साफ दिख रहा था – सफेद। और जब वह झुकी तो नाइटी के ऊपर से उसके चूचे पूरे दिखे – गोरे, मोटे, निप्पल खड़े हुए।
“अजय, थोड़ी मदद चाहिए थी,” उसने कहा, “मेरा बेडरूम का अलमारी का दरवाजा खुल नहीं रहा।”
मैं उसके घर गया। बेडरूम में घुसा तो एक अजीब खुशबू आई – औरतों की परफ्यूम और गर्मी की मिश्रित खुशबू। अलमारी ठीक करते वक्त मैंने देखा कि अलमारी में उसकी पैंटी और ब्रा रखी थीं। एक बड़ी साइज की ब्रा – 38D साइज, काली रंग की लेस वाली। और पैंटी – छोटी सी, सफेद, गीली लग रही थी।
“मिल गया?” स्नेहा ने पीछे से पूछा।
मैं घुमला तो वह सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थी। साड़ी नहीं पहनी थी। “गर्मी बहुत है ना…” उसने कहा, और जानबूझकर अपने बालों में हाथ फेरे जिससे उसके चूचे और उभर गए।
“स्नेहा, आप बहुत सुंदर हैं,” मैंने हिम्मत करके कहा।
उसने मेरी तरफ देखा, आंखों में एक अजीब चमक थी। “अच्छा? कितना सुंदर?”
“इतना कि मैं रोज आपके बारे में सोचता हूं,” मैंने कहा।
उसने एक कदम बढ़ाया। अब हम बहुत करीब थे। मैंने उसकी कमर पर हाथ रखा – इतनी नरम, इतनी गर्म। उसने सांस ली, लेकिन पीछे नहीं हटी।
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“आज शाम को आ जाना, मेरी बेटी कॉलेज गई है, मैं अकेली हूं,” उसने फुसफुसाते हुए कहा, और मेरे कान में एक किस कर दी।
शाम को 7 बजे मैं उसके घर पहुंचा। उसने दरवाजा खोला तो मैं देखता ही रह गया। उसने लाल रंग की ट्रांसपेरेंट साड़ी पहनी थी, और नीचे कोई ब्लाउज नहीं – सिर्फ एक लाल ब्रा जो उसके चूचों को आधा ढक रही थी। पेटीकोट भी इतना कसा हुआ था कि उसकी गांड की दरार साफ दिख रही थी।
“आ गए मेरे शेर,” उसने मुस्कुराते हुए कहा।
मैं अंदर आया। उसने दरवाजा बंद किया और ताला लगा दिया। फिर मेरी तरफ मुड़ी और अपनी साड़ी का पल्लू गिरा दिया। अब उसकी ब्रा पूरी तरह दिख रही थी – लाल लेस वाली, जिसमें से उसके गोरे चूचे बाहर निकलने को बेताब थे।
“क्या देख रहे हो? पकड़ो ना…” उसने कहा।
मैंने उसे पकड़ा और किस कर लिया। उसके होंठ इतने नरम, इतने गीले। मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाली और उसकी जीभ से खेलने लगा। वह भी रिस्पॉन्ड कर रही थी, मेरे बालों में हाथ फेर रही थी।
मैंने उसकी ब्रा के पीछे का हुक खोला। ब्रा खुली और दो बड़े, गोरे, भारी चूचे बाहर आए। वे इतने बड़े थे कि नीचे की तरफ थोड़े लटक रहे थे, लेकिन निप्पल इतने कड़े और गुलाबी। मैंने एक हाथ से एक चूचा पकड़ा – इतना भारी, इतना नरम, गर्मी महसूस हो रही थी।
“ऊह… और जोर से दबाओ…” स्नेहा ने सिसकी।
मैंने दोनों हाथों से उसके चूचे दबाना शुरू किया। निप्पलों को कसकर मसला। वह सिसकने लगी। फिर मैंने एक चूचा मुँह में ले लिया और चूसने लगा। “ऊह हां… चूसो… और जोर से…” वह पागल हो रही थी।
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मैंने उसे बिस्तर तक ले जाया और लिटा दिया। उसका पेटीकोट ऊपर किया – नीचे लाल रंग की पैंटी थी जो पूरी गीली हो चुकी थी। चूत का उभार साफ दिख रहा था, और एक अजीब खुशबू आ रही थी – औरत की गर्म चूत की खुशबू।
मैंने पैंटी खींची। एक गुलाबी, गीली चूत सामने थी। झांटें थोड़ी सफेद हो चुकी थीं, लेकिन चूत इतनी सुंदर – गुलाबी दानी बाहर निकली हुई, चारों तरफ गीली। मैंने उंगली डाली – गर्म पानी से भीगी, इतनी टाइट।
“ऊह माँ… धीरे…” स्नेहा चीखी।
मैंने उंगली अंदर बाहर करनी शुरू की। वह पागल हो रही थी। फिर मैंने अपना मुँह उसकी चूत पर रखा और चाटना शुरू किया। “ऊह हां… चाटो… और जोर से…” वह अपनी गांड उठा-उठाकर मेरे मुँह पर दबा रही थी।
मैंने उसकी चूत की दानी को मुँह में ले लिया और चूसने लगा। “ऊह… मर गई… बहुत मजा आ रहा है…” वह चिल्ला रही थी।
मैंने अपने कपड़े उतारे। मेरा 7 इंच का मोटा, काला लंड देखकर स्नेहा की आंखें खुली रह गईं। “इतना बड़ा… मेरे पति का तो आधा था…” वह फुसफुसाई।
मैंने उसके पैर फैलाए। उसकी चूत पूरी गीली और खुली हुई थी। मैंने लंड का टोपा चूत पर रखा – गर्मी महसूस हो रही थी। एक जोर का धक्का मारा – “ऊह हाहाह… माँ… दर्द…” स्नेहा चीखी, आंखों में आंसू आए।
पूरा लंड अंदर चला गया। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि लंड को कसकर पकड़े हुए थी। मैंने रुका, फिर धीरे-धीरे अंदर बाहर करना शुरू किया।
“ऊह… अब अच्छा लग रहा है… और तेज…” स्नेहा कहने लगी।
मैंने गति बढ़ाई। पच-पच-पच की आवाजें आ रही थीं। मैंने उसके चूचे पकड़े और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। बिस्तर हिल रहा था, दीवारों पर आवाजें गूंज रही थीं।
“चोदो… और जोर से चोदो…” स्नेहा पागल हो रही थी, “5 साल से कोई नहीं चोदा… बहुत दिनों से इसी का इंतजार था… ऊह… और तेज… मेरी चूत फाड़ दो…”
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मैंने उसके पैर अपने कंधों पर रखे और और गहरा धक्का मारा। लंड पूरी तरह अंदर चला गया – “ऊह… मर गई…” वह चीखी।
20 मिनट तक मैंने उसकी चूत में लंड पेलता रहा। फिर झड़ने वाला था – “अंदर ही निकालो… आज सेफ दिन है… मेरी चूत में भर दो अपना माल…” स्नेहा ने कहा।
मैंने एक आखिरी जोर का धक्का मारा और सारा गर्म, गाढ़ा माल उसकी चूत में छोड़ दिया। वह मुझे कसके पकड़े रही, मेरा लंड उसकी चूत में ही रहा जब तक पूरा माल अंदर नहीं चला गया।
फिर मैंने लंड बाहर निकाला – माल और उसकी चूत के पानी से पूरा लंड भीगा हुआ था। स्नेहा ने उसे चाट-चाटकर साफ किया।
डिंपल को नहाते हुए देखना
कुछ दिन बाद स्नेहा ने मुझे फोन किया – “आज डिंपल घर पर है, वह सो रही है, तुम आ जाओ।”
मैं उसके घर गया। दरवाजा खुला था। अंदर आवाजें आ रही थीं – पानी गिरने की आवाज। मैं आगे बढ़ा तो बाथरूम का दरवाजा थोड़ा खुला था और भाप निकल रही थी।
मैंने झांका – अंदर डिंपल नहा रही थी। शीशे में उसका पूरा बदन दिख रहा था। वह पूरी नंगी थी। उसके चूचे इतने गोरे, इतने कड़े, निप्पल गुलाबी और छोटे। उसकी कमर इतनी पतली, और गांड इतनी उभरी हुई।
वह शावर के नीचे खड़ी थी। पानी की बूंदें उसके बदन पर बह रही थीं। उसने हाथ अपने चूचों पर लगाया, मसला, फिर नीचे ले गई। उसकी चूत बिल्कुल साफ थी – कोई झांट नहीं, बिल्कुल गोरी और गुलाबी। उसने उंगली अपनी चूत में डाली और साफ करने लगी।
मेरा लंड पैंट में तड़प रहा था। मैं वहीं खड़ा होकर देखता रहा। फिर उसने एक पैर उठाया और चूत पर साबुन लगाया। उसकी चूत की दानी दिख रही थी – छोटी सी, गुलाबी।
तभी पीछे से आवाज आई – “क्या देख रहे हो…”
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मैं घबरा गया। पीछे स्नेहा खड़ी थी, लेकिन मुस्कुरा रही थी। उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने कान में फुसफुसाया – “कल शाम को आना, वह तुम्हें चाहती है… मैंने उसे सब बता दिया है…”
डिंपल के साथ पहली बार – कुंवारी चूत
अगले दिन शाम को मैं गया। स्नेहा बाहर गई हुई थी, घर पर सिर्फ डिंपल थी। उसने एक छोटी सी पिंक ड्रेस पहनी थी जो उसके जांघों तक ही थी। नीचे कुछ नहीं पहना था – मैंने जब वह झुकी तो देख लिया।
“मम्मी ने बताया आपके बारे में…” डिंपल ने शर्माते हुए कहा, “मैंने कभी किसी के साथ… नहीं किया…”
“मैं सिखाऊंगा…” मैंने कहा और उसे किस कर लिया।
उसके होंठ इतने नरम, इतने मीठे। मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाली। वह थोड़ा कांप रही थी। मैंने उसकी ड्रेस ऊपर की – नीचे कुछ नहीं था। एक गोरी, चिकनी चूत सामने थी – बिल्कुल साफ, कोई झांट नहीं, गुलाबी दानी थोड़ी बाहर निकली हुई।
“डर लग रहा है…” उसने कहा।
“पहले दर्द होगा, फिर मजा आएगा…” मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया।
मैंने उसके चूचे दबाए – इतने कड़े, इतने गोरे। फिर नीचे गया और उसकी चूत चाटने लगा। “ऊह… यह क्या कर रहे हो… माँ…” वह पागल हो रही थी।
मैंने उसकी चूत की दानी को चूसा। वह अपनी गांड उठा-उठाकर मेरे मुँह पर दबा रही थी। फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला। 7 इंच का मोटा, काला लंड देखकर डिंपल डर गई – “इतना बड़ा… नहीं जाएगा… मेरी चूत फट जाएगी…”
“आराम से जाएगा…” मैंने उसके पैर फैलाए।
उसकी चूत बहुत छोटी थी, गुलाबी दानी बाहर निकली हुई। मैंने लंड का टोपा चूत पर रखा – गर्मी महसूस हो रही थी। धीरे से अंदर डाला – “ऊह… माँ… दर्द…” डिंपल चीखी, आंखों में आंसू आए।
मैंने रुका, फिर धीरे-धीरे अंदर बाहर करने लगा। 5 मिनट बाद उसे भी मजा आने लगा।
“ऊह… अब अच्छा लग रहा है… और तेज…” वह कहने लगी।
मैंने गति बढ़ाई। उसकी कुंवारी चूत इतनी टाइट थी कि लंड को कसकर पकड़े हुए थी। पच-पच की आवाजें आ रही थीं।
“और जोर से चोदो…” डिंपल चिल्ला रही थी, “मेरी कुंवारी चूत फाड़ दो…”
मैंने 20 मिनट तक उसकी चूत में लंड पेला। फिर झड़ने वाला था – “मुँह में निकालूं?”
“हां… पी लूंगी…” उसने कहा।
मैंने लंड बाहर निकाला और उसके मुँह में दिया। उसने चूसना शुरू किया और मैंने सारा गर्म, गाढ़ा माल उसके मुँह में भर दिया। उसने सब पी लिया, एक बूंद भी नहीं गिरने दी।
मां-बेटी साथ में चुदाई का मजा
अगले दिन स्नेहा ने मुझे बुलाया। घर पर वह और डिंपल दोनों थीं। स्नेहा ने कहा – “आज हम दोनों को एक साथ चोदना है…”
मैंने स्नेहा को बिस्तर पर लिटाया, डिंपल को उसके ऊपर। दोनों की चूतें एक साथ दिख रही थीं – मां की थोड़ी फैली हुई, गहरी, गीली, बेटी की टाइट, छोटी, गुलाबी।
पहले मैंने स्नेहा की चूत में लंड डाला – “ऊह हां… मेरी चूत में आ गया…” वह चिल्लाई। मैंने 5 मिनट तक चोदा, फिर निकालकर डिंपल की चूत में डाला – “ऊह माँ… इतना मोटा…” वह चीखी।
मैं बारी-बारी से दोनों की चूत चोदने लगा। स्नेहा के चूचे दबाता, डिंपल की चूत में उंगली करता। दोनों औरतें मदहोश हो रही थीं।
फिर मैंने स्नेहा को कुतिया बनाया और पीछे से चोदने लगा। डिंपल नीचे लेटी थी, मैं उसकी चूत चाट रहा था। “ऊह… मम्मी… मजा आ रहा है…” डिंपल कह रही थी।
फिर मैंने डिंपल को कुतिया बनाया और स्नेहा की चूत चाटी। “और जोर से…” दोनों एक साथ चिल्ला रही थीं।
आखिर में मैंने दोनों के मुँह में अपना लंड दिया। मां-बेटी ने मिलकर चूसा, एक-दूसरे के साथ लंड बांटा। और मैंने दोनों के चेहरे पर अपना गर्म, गाढ़ा माल निकाल दिया। दोनों ने चेहरा साफ किया और एक-दूसरे को किस किया, मेरा माल एक-दूसरे के चेहरे पर लगाया।
अब हम तीनों रोज एक साथ मजे करते हैं। कभी मां अकेले, कभी बेटी अकेले, कभी दोनों साथ में। पड़ोस में रहना अब मेरे लिए स्वर्ग बन गया है।
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